सच और साहस की जीत ! पी.के. है क्या ?

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If you can read Hindi, please go through this. A piquant, sarcastic, witty yet biting piece, reminding you of the ground realities of development challenges in Bihar. (Its written by someone who is a close friend)

But be on guard, Hindi is not always easy!

 

“हमका लागत है भगवान से बात करे का कम्यूनिकेशन सिस्टम इस गोला का टोटल लूल हो चुका है….” पी.के. का यह कालजयी संवाद यूं तो सभ्यता के इतिहास की कई त्रासदियों में भगवान की घनघोर असफलता को रेखांकित…

Source: सच और साहस की जीत ! पी.के. है क्या ?

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One thought on “सच और साहस की जीत ! पी.के. है क्या ?

  1. इस बात से मैं सहमत तो नहीं हूँ कि दुसरे ” किशोर ” को लोग जानते नहीं है….. जिन लोगो का स्वास्थय से कुछ भी नाता रहा होगा उन्होंने इस ” पी० के ० ” के काम को जरुर देखा और सराहा होगा .. भले हि उन लोगो को ये ना पता हो कि इस काम के पीछे कौन सा पी० के ० है या ये पी० के ० कौन है या दिखता कैसा है … आज मेरे मोहल्ले के राजबंशी नगर अस्पताल को देख कर लोग जब लोग बोलते हैं कि ” बदला है ” तो इस बात कि ख़ुशी मिलती है कि उस व्यक्ति के साथ काम करने का मौका मिला है … बात तो सही है कि गलती तो हो गई कि “ स्वार्थ “ कि इस दुनिया में बिना स्वार्थ के काम करने कि गलती इस पी० के ० ने कर दी … जब आप इस पी० के के दूरदर्शिता के बारे में बात करेंगे तो लगेगा कि क्यू ऐसा सोचता है ये पी० के ० … खुद को छोरकर, लुल सिस्टम के विरुध जाकर चीजों के खिलाफ क्यू काम करना चाहता है … आज राजा इतरा रहे है कि दुसरे “पी० के ० “ ने विजय दिला दी लेकिन उस देहात में इस पी० के ० जैसे लोगो ने जो काम किये होंगे उसका फायदा उस दुसरे पी० के ० को मिला तो जरुर होगा … गलती तो हुई हुजूर … मार्केटिंग कि चकचौंध से दूर काम करने में व्यस्त रह गया हमारा ये पी० के ०…… परन्तु कहते है ना कि “ देर आये दुरुस्त आये “ तो शायद ये उम्मीद करे कि उन्ही पॉलीटिक्स और ब्यूरोक्रेसी मार्केट के व्यापारी और दलालों के कारण जब आज के राजा , जब राजा ना रहेंगे तब उन्हें इस बात का एहसास हो कि इन जैसे ” पी० के ०” के कार्यो कि उपेक्षा के कारण राजतंत्र चला गया !

    काम नहीं भाई .. मार्केटिंग का ज़माना है दोस्त !

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